कहा— सरकार और विपक्ष गंभीरता से करें विचार, साल में कम से कम 100 दिन चले कार्यवाही
लखनऊ,संवाददाता : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में सत्रों की घटती अवधि पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बार-बार हंगामे और स्थगन के कारण जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी चर्चा नहीं हो पा रही है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर विचार करना चाहिए।
मायावती ने मंगलवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) खाते पर पोस्ट करते हुए कहा कि संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों का समय लगातार कम होता जा रहा है, जिससे इन संस्थाओं की जन-उपयोगिता प्रभावित हो रही है। उन्होंने लखनऊ में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर चिंता जताए जाने को उचित, सामयिक और सराहनीय बताया।
बसपा प्रमुख ने कहा कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन निर्धारित कैलेंडर के अनुसार और नियमों के तहत शांतिपूर्ण ढंग से चलना बेहद आवश्यक है। यह सम्मेलन 19 जनवरी से शुरू होकर 21 जनवरी तक चलेगा। इसके साथ ही मायावती ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के उस फैसले का भी स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि केवल सरकारी मान्यता न होना किसी मदरसे को बंद करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे के भीतर हटाने के निर्देश को भी महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की नीतिगत मंशा प्राइवेट मदरसों के खिलाफ नहीं होती, बल्कि जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी के कारण ऐसी अप्रिय घटनाएँ सामने आती हैं। उन्होंने सरकार से इस पर उचित संज्ञान लेने की मांग की।























