पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में प्रदेशभर के पुस्तकालयाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई
लखनऊ,संवाददाता : शिक्षा निदेशालय, शिविर कार्यालय (18, पार्क रोड) में बुधवार को अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में केंद्रीय राज्य पुस्तकालय तथा प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के पुस्तकालयाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष सचिव उमेश चंद्र, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) महेंद्र देव, अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी एवं विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) शान्त्वना तिवारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को आमजन के लिए अधिक उपयोगी, सुलभ एवं प्रभावी बनाना था। इस अवसर पर नवाचार करने वाले पुस्तकालयों द्वारा पीपीटी के माध्यम से अपने कार्यों एवं अभिनव प्रयोगों का प्रस्तुतीकरण किया गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन पुस्तकालयों की बेस्ट प्रैक्टिसेज को मॉडल के रूप में अपनाते हुए प्रदेश के सभी पुस्तकालयों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अपर मुख्य सचिव सेन शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के संग्रहण स्थल न मानकर उन्हें “ज्ञान केंद्र” के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि वे समाज की शैक्षिक एवं बौद्धिक आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें।

उन्होंने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल कंटेंट की उपलब्धता सुनिश्चित करने, पुस्तकालयों के प्रचार-प्रसार हेतु सोशल मीडिया के अधिकतम उपयोग तथा पुस्तकों के निर्गमन-वापसी की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन इशू-रिटर्न प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अपर मुख्य सचिव ने एक नया रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने निर्देश दिए कि पुस्तकालय बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करें, जिससे शिक्षक स्वयं पुस्तकालयों से जुड़ें और विद्यार्थियों को भी पठन की ओर प्रेरित कर सकें। साथ ही पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पठन कार्यक्रम, चर्चा सत्र एवं ज्ञान-संवाद आयोजित करने तथा स्थानीय समाज की भागीदारी से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
पुस्तकालयों को अधिक जीवंत बनाने के उद्देश्य से प्रकाशकों, लेखकों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ सतत संपर्क बनाए रखने तथा नियमित रूप से ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए, जिससे पाठकों को लेखकों से सीधे संवाद का अवसर मिल सके और पठन अभिरुचि को बढ़ावा मिले।























