मतदाता सूची से नाम कटने से भाजपा और सपा दोनों की चुनावी चिंता बढ़ी है
लखनऊ,संवाददाता : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद उत्तर प्रदेश में करीब 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की खबर ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ा दी है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 में चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते नाम नहीं जुड़े, तो 10 हजार से कम वोटों वाली सीटों पर सबसे बड़ा नुकसान सत्तारूढ़ दल को हो सकता है।
क्यों अहम हैं कम मार्जिन वाली सीटें?
- 2022 में 114 सीटें ऐसी थीं जहां जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम रहा
- BJP: 63 सीटें
- SP: 41 सीटें
- 15 सीटें ऐसी थीं जहां अंतर 1,000 वोट से भी कम था (10 सीटों पर 500 से कम)
- 2017 के मुकाबले 2022 में मार्जिन का तेजी से सिमटना BJP के लिए चेतावनी संकेत था—60+ सीटें 10 हजार से कम अंतर से जीती गईं।
SIR का संभावित प्रभाव: किसे नुकसान, किसे फायदा?
BJP की चिंता क्यों ज्यादा?
- शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नाम कटने की रिपोर्ट—जहां BJP पारंपरिक रूप से मजबूत रही है।
- कई सीटों पर 32 हजार से 1.12 लाख तक नाम कटने की बात—जो 2022 के जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा है।
- पूर्वांचल और अवध में अति-पिछड़ी/OBC वोटों पर असर की आशंका, जहां BJP की बढ़त अक्सर मामूली रही।
SP को कहां झटका लग सकता है?
- जिन जिलों में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा रोजगार के कारण बाहर रहता है, वहां नाम कटने से SP के वोट आधार पर असर।
- दोबारा नाम जुड़वाने की जटिल प्रक्रिया से टर्नआउट घट सकता है।
क्षेत्रवार तस्वीर
- पश्चिमी यूपी व बुंदेलखंड: 22 कम मार्जिन सीटें; 2022 में BJP 13, SP-RLD 9। अब RLD अलग—वोट बंटवारे का जोखिम।
- मध्य यूपी (अवध): 50 सीटें; BJP 30, SP 20। OBC निर्णायक—SIR के बाद दोनों के समीकरण हिल सकते हैं।
- पूर्वांचल: 27 सीटें; 2022 में गठबंधन (SP-सुभासपा) असरदार था। अब सुभासपा BJP के साथ—BJP को तुलनात्मक रूप से ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
‘डेंजर ज़ोन’ में 99 सीटें
2022 में 1,000 से 10,000 वोट के अंतर वाली 99 सीटें अब SIR के बाद सबसे संवेदनशील मानी जा रही हैं। इन सीटों पर मतदाता सूची में बड़े बदलाव परिणाम पलटने की क्षमता रखते हैं।
























