2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में संघ ने बनाई रणनीति
लखनऊ,संवाददाता : मथुरा के वृंदावन स्थित केशव धाम में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक ने साफ संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में संघ की सबसे बड़ी सामाजिक-राजनीतिक प्रयोगशाला बनने जा रहा है। बैठक में संघ ने 2027 के विधानसभा चुनाव को केंद्र में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे, सामाजिक रणनीति और भारतीय जनता पार्टी के साथ समन्वय, तीनों मोर्चों पर हस्तक्षेप की विस्तृत रूपरेखा तैयार की।
संगठनात्मक ढांचे में बड़ा पुनर्गठन
बैठक में संघ ने प्रस्तावित किया कि प्रांत प्रचारकों की भूमिका को प्रदेश स्तर पर केंद्रीकृत किया जाएगा, जबकि संभाग स्तर पर नए प्रचारकों की तैनाती की जाएगी। इसका उद्देश्य मोहल्लों, बस्तियों और गांवों तक संघ की सीधी पहुंच बनाना और निष्क्रिय स्वयंसेवकों को सक्रिय करना है। मार्च से देशभर में लागू होने वाली यह नई प्रणाली यूपी में प्राथमिकता के साथ लागू होगी।
हिंदुत्व का नया स्वरूप
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संदेश दिया कि हिंदुत्व को केवल प्रतीकों और आंदोलनों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा गतिविधियों के जरिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच बनाई जाएगी। ओबीसी वर्ग को यूपी की राजनीति की निर्णायक धुरी मानते हुए सामाजिक समरसता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पसमांदा मुस्लिमों के लिए रणनीति
बैठक में पसमांदा मुस्लिम समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके लिए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक संवाद योजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील, लेकिन दीर्घकालिक असर वाली रणनीति मानी जा रही है।
भाजपा के साथ समन्वय
वृंदावन में भाजपा नेतृत्व के साथ समन्वय बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव के फीडबैक और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। संघ ने स्पष्ट किया कि योगी आदित्यनाथ पार्टी के मजबूत चेहरे हैं, लेकिन सामाजिक संतुलन और संगठन की प्राथमिकताओं पर ध्यान देना जरूरी है।
























