रक्षा बजट में 20% तक बढ़ोतरी की संभावना, आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक युद्ध क्षमता पर होगा फोकस
नई दिल्ली,संवाददाता : वित्त वर्ष 2026-27 के यूनियन बजट में रक्षा क्षेत्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार रक्षा बजट में 20 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जा सकती है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय को 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो उससे पहले के वर्ष की तुलना में 9.5% अधिक था। अब रक्षा मंत्रालय और नीति विशेषज्ञों की मांग के आधार पर कैपिटल आउटले में इससे भी अधिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विश्लेषकों के मुताबिक यह बढ़ोतरी भारत की बदलती सुरक्षा चुनौतियों, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सीमा सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा सकती है। इसे अब तक का सबसे तेज एकल-वर्षीय रक्षा बजट उछाल माना जा रहा है।
बजट के प्रमुख फोकस क्षेत्र
- पूंजीगत खर्च में भारी इजाफा और तेज सैन्य आधुनिकीकरण
- स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती
- AI, ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और साइबर सुरक्षा पर निवेश
- डिफेंस स्टार्टअप्स और घरेलू उद्योग को बढ़ावा
- निर्यात, IP नीति और तेज कॉन्ट्रैक्टिंग प्रक्रिया में सुधार
क्यों जरूरी है इतनी बड़ी बढ़ोतरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को रक्षा खर्च को GDP के 1.9% से बढ़ाकर 2.5% या उससे अधिक करना होगा। हाल के ऑपरेशनल अनुभव, हाइब्रिड युद्ध, साइबर हमले और ड्रोन-आधारित खतरों ने मजबूत रक्षा तैयारियों की जरूरत को और स्पष्ट कर दिया है।
गेम-चेंजर बन सकता है बजट 2026
अगर अनुमान सही साबित होते हैं, तो बजट 2026 न सिर्फ हथियार खरीद तक सीमित रहेगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात हब बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
























