भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दोहराया
नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विकसित भारत सहित सभी राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में देशवासियों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि भारतीय समाज में असीम शक्ति है और सरकार व समाज के सहयोग से देश में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार शाम राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में यह बातें कहीं। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत आज भी दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय अवसंरचना के निर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश कर देश अपनी आर्थिक संरचना का उच्च स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा, “आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं।”
संविधान, लोकतंत्र और समाज की भूमिका पर जोर
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के महत्व, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं की भूमिका तथा देश की सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने सशस्त्र सेनाओं, पुलिस बलों, किसानों, शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों, युवाओं, सफाईकर्मियों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और समाजसेवकों के योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने महिलाओं, आदिवासियों, गरीबों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण एवं कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
महापुरुषों को किया नमन
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में सरदार वल्लभभाई पटेल, महाकवि सुब्रमण्य भारती, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, बिरसा मुंडा, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय, श्री नारायण गुरु, रविंद्रनाथ ठाकुर, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और महर्षि अरविंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया गया है और गांवों व शहरों की स्थानीय संस्थाओं को प्रगतिशील बदलाव का माध्यम बनाया गया है।
आर्थिक सुधारों और डिजिटल भुगतान का उल्लेख
राष्ट्रपति ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को देश के आर्थिक एकीकरण का महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे पूरे देश में एकीकृत बाजार का निर्माण हुआ है। उन्होंने श्रम सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रमिकों को लाभ मिलेगा और उद्यमों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्व समुदाय के लिए एक प्रभावशाली उदाहरण बन गई है।
किसानों को बताया अर्थव्यवस्था की रीढ़
राष्ट्रपति ने किसानों को भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था का मेरुदंड बताते हुए कहा कि उनकी परिश्रमी पीढ़ियों ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उचित मूल्य, सस्ती दरों पर ऋण, बीमा सुरक्षा, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाएं, उर्वरक और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के योगदान का सम्मान किया जा रहा है और उनके प्रयासों को मजबूती प्रदान की जा रही है।
























