वित्त मंत्रालय की आर्थिक समीक्षा में अनुमान, पश्चिम एशिया तनाव से तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर चिंता
नई दिल्ली : भारत वित्त वर्ष 2027-28 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह अनुमान भारत का वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने फरवरी 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में जताया है।
समीक्षा के अनुसार, फरवरी में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की नई सीरीज जारी होने के बाद 31 मार्च को समाप्त हो रहे मौजूदा वित्त वर्ष में वर्तमान मूल्यों पर आधारित नॉमिनल जीडीपी का अनुमान 357.1 लाख करोड़ रुपये से घटकर 345.5 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में रुपये में गिरावट भी दर्ज की गई है। इन दोनों कारकों को देखते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027-28 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई गई थी, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के कारण डॉलर में जीडीपी का आकार कम हो गया।
पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता
आर्थिक समीक्षा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए, जिनमें अन्य देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर रहे। तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमलों से आपूर्ति में अस्थायी व्यवधान पैदा हुआ है। फिलहाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद बताया गया है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था सहित भारत पर भी पड़ेगा।
भारत पर पड़ सकता है दीर्घकालिक असर
मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से जारी इस संघर्ष का भारत पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के अधिक भंडारण की आवश्यकता होगी। इसके लिए वित्तीय संसाधन भी जुटाने होंगे और आने वाले वर्षों में आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में कर नीति और कर प्रशासन में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया गया है ताकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित किया जा सके। साथ ही इस संघर्ष के कारण भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) पर जोखिम बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।
व्यापारियों को एफटीए का लाभ उठाने की सलाह
मंत्रालय ने भारतीय व्यापारियों को विभिन्न देशों और आर्थिक क्षेत्रों के साथ हाल में हुई मुक्त व्यापार संधियों (FTA) का लाभ उठाने की सलाह दी है। इसके लिए गुणवत्ता, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को आवश्यक बताया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि भारत फिलहाल आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में है, लेकिन यह आत्मसंतुष्टि का समय नहीं है। कोविड-19 के बाद के बेहतर प्रदर्शन को इतिहास मानते हुए भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहने की जरूरत है। सरकार की उद्यम समर्थक नीतियां और तेज निर्णय लेने की क्षमता निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं, जिससे भुगतान संतुलन पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।





















