दो दिवसीय उत्सव में उत्तराखंड की परंपराएं, लोककला और धार्मिक आस्था का सजीव प्रदर्शन
रामनगर,संवाददाता : उत्तराखंड के रामनगर में गुरुवार से बसंत महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हो गया। दो दिनों तक चलने वाले इस बसंत उत्सव के दौरान सांस्कृतिक, लोककलात्मक और पारंपरिक कार्यक्रमों की भव्य श्रृंखला आयोजित की जा रही है। महोत्सव के पहले ही दिन नगर में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
बसंत महोत्सव के अवसर पर रामनगर की सड़कों पर निकली रंग-बिरंगी झांकियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। झांकियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक परिधान, लोकवाद्य यंत्रों की मधुर धुन और मनमोहक लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
झांकियों में विशेष रूप से उत्तराखंड में प्रचलित हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार होने वाली पारंपरिक शादियों का सजीव चित्रण किया गया। विवाह से जुड़ी रस्में, पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को संस्कृति की गहराइयों से रूबरू कराया। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने इस सांस्कृतिक दृश्य का आनंद लिया। इसके अलावा झांकियों में उत्तराखंड के देवी-देवताओं की झलक भी देखने को मिली, जिसमें लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। महोत्सव के दौरान झोड़ा नृत्य सहित अन्य लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
कलाकारों ने पारंपरिक गीत-संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की लोककला को जीवंत किया, जिस पर दर्शक तालियों के साथ झूमते नजर आए। आयोजकों के अनुसार बसंत महोत्सव का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ना है। आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। बसंत महोत्सव का यह भव्य आगाज़ रामनगर में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश देता नजर आया, जिसने नगरवासियों के साथ-साथ बाहर से आए लोगों को भी उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
























