मध्य 2025 में यह आंकड़ा 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक था
नई दिल्ली: भारत ने कच्चे तेल के आयात की रणनीति में बदलाव करते हुए कम जोखिम और अधिक भरोसेमंद आपूर्ति पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत पश्चिम एशिया से आयात बढ़ाया जा रहा है, जबकि रूस से सीमित मात्रा में आपूर्ति जारी रखी गई है। विश्लेषण फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के पहले तीन हफ्तों में रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। यह पिछले महीने के औसत 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन से कम है, जबकि मध्य 2025 में यह आंकड़ा 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक था।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। केप्लर के मुताबिक, इराक अब रूस के बराबर मात्रा में भारत को तेल की आपूर्ति कर रहा है। दिसंबर 2025 में इराक से औसतन 9.04 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात हुआ था। वहीं, सऊदी अरब से आयात भी बढ़कर इस महीने 9.24 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है। दिसंबर में यह 7.10 लाख बैरल प्रतिदिन और अप्रैल 2025 में 5.39 लाख बैरल प्रतिदिन था। गौरतलब है कि 2022 में रूस, इराक को पीछे छोड़ते हुए भारत का शीर्ष कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूरोप और पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल से दूरी बनाने के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने भारी छूट वाले रूसी तेल की बड़े पैमाने पर खरीद की थी।
केप्लर के शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार,
“जनवरी 2026 में भारत की कच्चे तेल की खरीद कम जोखिम वाली और अधिक विश्वसनीय आपूर्ति की ओर स्पष्ट बदलाव दिखाती है। पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि रूस से सीमित आपूर्ति बनी हुई है।”
























