ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा
दिनांक: 18 जनवरी 2026
दिन: रविवार
विक्रम संवत: 2082
शक संवत: 1947
अयन: उत्तरायण
ऋतु: शिशिर
मास: माघ
पक्ष: कृष्ण
तिथि:
अमावस्या रात्रि 01:08 बजे तक, तत्पश्चात प्रतिपदा (गुप्त नवरात्रि का आरंभ)
नक्षत्र:
पूर्वाषाढ़ा प्रातः 10:29 बजे तक, तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा
योग:
हर्षण रात्रि 09:54 बजे तक, तत्पश्चात वज्र
राहुकाल:
सायं 04:30 से 06:00 बजे तक
सूर्योदय: प्रातः 06:41 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:19 बजे
दिशाशूल: पश्चिम दिशा में
व्रत एवं पर्व
दर्श अमावस्या, माघ अमावस्या, मौनी अमावस्या
विशेष: अमावस्या
गुप्त नवरात्रि विशेष
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रथम नौ तिथियाँ गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। वर्ष 2026 में गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी, सोमवार से होगा। एक वर्ष में कुल चार नवरात्रियाँ होती हैं। इनमें से दो नवरात्रियाँ सर्वविदित हैं, जबकि शेष दो गुप्त नवरात्रियाँ साधना एवं सिद्धि के लिए विशेष मानी जाती हैं।
शत्रु को मित्र बनाने हेतु साधना
नवरात्रि काल में शुभ संकल्पों की सिद्धि, मनोवांछित फल प्राप्ति एवं शत्रुता के शमन के लिए विशेष योग बनता है। नवरात्रि में स्नान आदि से निवृत्त होकर तिलक लगाकर दीप प्रज्वलित करें। इसके पश्चात बीज मंत्र “हूं” अथवा “अं रां अं” का 21 माला जप करें तथा श्री गुरुगीता का पाठ करें। मान्यता है कि इससे शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करने लगते हैं।
माताओं के लिए विशेष कष्ट निवारण प्रयोग
जिन महिलाओं को अधिक मानसिक या शारीरिक कष्ट रहता हो, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी स्थापना के दिन) दीपक जलाकर कुमकुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें तथा निम्न मंत्र का उच्चारण करें: “अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले” भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस विधि से शीघ्र कष्ट निवारण होता है।
माताओं के लिए विशेष कष्ट निवारण प्रयोग
माघ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बिना नमक-मिर्च का भोजन करें। (दूध, रोटी अथवा खीर ग्रहण की जा सकती है।)उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुमकुम का तिलक लगाएँ और मंत्र जप करें: “ॐ ह्रीं गौरये नमः” इसके पश्चात गाय को चंदन का तिलक लगाकर गुड़ एवं रोटी खिलाएँ।
श्रेष्ठ धन-प्राप्ति हेतु साधना
नवरात्रि में देवी के विशेष मंत्र का जप करने से आर्थिक समृद्धि का योग बनता है। मंत्र इस प्रकार है: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल-वासिन्यै स्वाहा”
विद्यार्थियों के लिए विशेष निर्देश
नवरात्रि के प्रथम दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रखकर पूजन करें। नवरात्रि के प्रथम तीन दिनों तक सरस्वती मंत्र का जप करें। इससे विद्या, स्मरण शक्ति एवं परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है। बुद्धि एवं ज्ञान-विकास हेतु सूर्यदेव का ध्यान भ्रूमध्य में करें। जिन्हें गुरुमंत्र प्राप्त है, वे गुरुमंत्र, गुरुदेव एवं सूर्यनारायण का ध्यान करें। नवरात्रि में प्रतिदिन इस सरल साधना की एक-दो माला अवश्य करें और लाभ प्राप्त करें।






















