ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा
दिन: मंगलवार
विक्रम संवत: 2082
शक संवत: 1947
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद
मास: आश्विन
पक्ष: कृष्ण
तिथि: दशमी रात्रि 2:39 तक, तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र: आर्द्रा सुबह 10:22 तक, तत्पश्चात पुनर्वसु
योग: वरीयान रात्रि 4:35 तक, तत्पश्चात परिघ
राहुकाल: दोपहर 3:00 से 4:30 तक
सूर्योदय: सुबह 5:54
सूर्यास्त: शाम 6:06
दिशाशूल: उत्तर दिशा में
व्रत/पर्व: दशमी का श्राद्ध
विशेष जानकारी
इंदिरा एकादशी व्रत
- एकादशी व्रत कथा सुनने से पितरों को शांति और मुक्ति मिलती है।
- पितृपक्ष में आने वाली यह एकादशी विशेष फलदायी मानी जाती है।
षडशीति संक्रांति
- तिथि: 17 सितम्बर 2025, बुधवार
- पुण्यकाल: सूर्योदय से दोपहर 12:21 तक
- इस काल में जप, तप, ध्यान, सेवा आदि का पुण्य 86,000 गुना होता है।
- यह काल अत्यंत पुण्यदायी है, अतः अन्य सभी कार्य छोड़कर ध्यान, जप और प्रार्थना करें।
एकादशी व्रत विवरण
- प्रारंभ: 16 सितम्बर की रात 2:39 से
- समाप्ति: 17 सितम्बर की रात 1:15 तक
- उपवास तिथि: 17 सितम्बर, बुधवार
व्रत के लाभ:
- एकादशी व्रत से प्राप्त पुण्य सूर्यग्रहण, गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ आदि से भी अधिक होता है।
- पितरों को मोक्ष मिलता है, घर में सुख-शांति, संतान और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
- कीर्ति, श्रद्धा और भक्ति में वृद्धि होती है।
- भगवान विष्णु की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
- पूर्वकालीन राजा नहुष, अंबरीष आदि ने भी इस व्रत के द्वारा महान ऐश्वर्य प्राप्त किया था।
एकादशी के दिन करने योग्य कार्य:
- दीप जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
- यदि संभव न हो, तो गुरुमंत्र की 10 माला जप करें।
- यदि घर में कलह हो, तो संकल्प करके विष्णु सहस्त्रनाम पाठ करें, इससे शांति मिलेगी।
- पितृ स्तोत्र, राम रक्षा स्तोत्र, एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विशेष फलदायी है।
एकादशी के दिन सावधानियाँ:
- वृद्ध, बालक और रोगी यदि व्रत न कर सकें, तो भी चावल का त्याग अवश्य करें।
- धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से प्रत्येक चावल के साथ एक-एक कीड़े के बराबर पाप लगता है।
























