मकर संक्रांति पर 15 को स्नान का शुभ मुहूर्त

डॉ उमाशंकर मिश्रा, लखनऊ : जिस दिन भगवान सूर्यनारायण उत्तर दिशा की ओर प्रयाण करते हैं, उस दिन उत्तरायण (मकर संक्रांति) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन से अंधकारमयी रात्रि का क्षय और प्रकाशमय दिवस की वृद्धि प्रारंभ होती है। उत्तरायण का केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अर्थ भी है—आकाश के देवता सूर्य की कृपा से हृदय में अनासक्ति और सद्भाव का जागरण।
धर्माचार्यों के अनुसार, नीचे के केंद्रों में वासनाएं और आकर्षण होते हैं, जबकि ऊपर के केंद्रों में निष्कामता, प्रीति और आनंद का वास होता है। मकर संक्रांति जीवन की दिशा बदलने का पर्व है। इस दिन संकल्प लें कि सोच, विचार और कर्म को शुद्ध दिशा दी जाए, क्योंकि जैसी सोच होगी, वैसा विचार और वैसा ही कर्म होगा।

सूर्य-शुक्र युति से तीन राशियों के चमकेंगे भाग्य
14 जनवरी 2026 को सूर्य देव उत्तरायण में प्रवेश करेंगे और इसी दिन मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा-अर्चना कर उन्हें गुड़, खिचड़ी और रेवड़ी का भोग अर्पित करने की परंपरा है। इस वर्ष मकर संक्रांति विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन मकर राशि में सूर्य और शुक्र देव एक साथ विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह सूर्य-शुक्र युति अत्यंत शुभ फलदायी मानी जाती है, जिसका लाभ तीन राशियों के जातकों को विशेष रूप से मिलेगा।
वृषभ राशि
मकर संक्रांति पर बन रही सूर्य-शुक्र की युति वृषभ राशि वालों के लिए धन और समृद्धि के संकेत दे रही है।
- धन-धान्य की सहज प्राप्ति
- आय के स्रोतों में वृद्धि
- पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से लाभ
- पारिवारिक एवं वैवाहिक संबंधों में मधुरता
- स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में सुधार
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए मकर संक्रांति का पर्व कई शुभ अवसर लेकर आएगा।
- वर्ष 2025 की अधूरी इच्छाएं पूरी होने के योग
- करियर और कारोबार में जबरदस्त प्रगति
- नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छा अवसर
- नया कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल समय
- पारिवारिक संबंधों में सुधार और बेहतर तालमेल
- पुराने रोगों से राहत के संकेत
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए यह संक्रांति विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
- आर्थिक लाभ और अचानक धन प्राप्ति के योग
- भविष्य को लेकर नई योजनाओं पर कार्य
- संपत्ति और पुराने निवेश से लाभ की संभावना
- जीवनसाथी के साथ समय बिताने के सुनहरे अवसर
- स्वास्थ्य की स्थिति सामान्य और संतोषजनक
सम्यक क्रांति का पर्व
यद्यपि प्रत्येक माह संक्रांति आती है, किंतु मकर संक्रांति वर्ष में केवल एक बार आती है। इसी उत्तरायण काल की प्रतीक्षा भीष्म पितामह ने की थी और इसी काल में उन्होंने देह त्याग किया। यह पर्व पुण्य, आरोग्यता और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना गया है।

पुण्य व आरोग्य अर्जन का विधान
धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और जप का विशेष महत्व है।
- तिल से उबटन लगाकर स्नान करना आरोग्यदायक माना गया है।
- तिल मिश्रित जल से सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का क्षय होता है।
- तिल का दान पापनाशक, तिल का भोजन स्वास्थ्यवर्धक और तिल का हवन पुण्यदायक होता है।
- सूर्य उदय से पूर्व स्नान करने से दस हजार गौदान के समान फल प्राप्त होता है।
- उत्तरायण में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं।
तिल-गुड़ के व्यंजन, चावल व चने की दाल की खिचड़ी ऋतु परिवर्तन से होने वाले रोगों से रक्षा करती है।
सूर्य उपासना का विशेष महत्व
धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्मज्ञान सर्वप्रथम भगवान सूर्य को प्राप्त हुआ। वे निष्काम, निष्कलंक और कर्तव्यनिष्ठ देवता हैं।
पद्म पुराण में सूर्यदेव का मूल मंत्र वर्णित है—
“ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः”
इस मंत्र का आत्मप्रीति और आत्मानंद की भावना से जप करने पर प्रभु-प्रेम और आनंद में वृद्धि होती है।
ओज–तेज–बल का स्रोत : सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार से बुद्धि, तेज और बल की वृद्धि होती है।
“ॐ सूर्याय नमः”, “ॐ भानवे नमः”, “ॐ रवये नमः” आदि मंत्रों से किया गया सूर्य नमस्कार प्राणायाम और व्यायाम दोनों का फल देता है।
आरोग्य व पुष्टि वर्धक : सूर्य स्नान
सूर्य की धूप में रखे गए जल से स्नान करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सूर्य स्नान से हड्डियों की मजबूती बनी रहती है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।























