ज्योतिष आचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा
विक्रम संवत : 2082
शक संवत : 1947
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : शिशिर
मास : पौष
पक्ष : शुक्ल
तिथि
द्वादशी – रात्रि 10:51 तक
तत्पश्चात त्रयोदशी
नक्षत्र : कृत्तिका – रात्रि 11:11 तक, तत्पश्चात रोहिणी
योग : साध्य – रात्रि 7:23 तक, तत्पश्चात शुभ
राहुकाल : दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक
सूर्योदय : प्रातः 6:47
सूर्यास्त : सायं 5:13
दिशाशूल : उत्तर दिशा
व्रत / पर्व विवरण : —
विशेष : द्वादशी
वास्तु शास्त्र : पुराने कैलेंडर घर में रखना शुभ नहीं
वास्तु शास्त्र के अनुसार पुराने कैलेंडर लगाने से प्रगति के अवसर कम हो जाते हैं। नए वर्ष में नया कैलेंडर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा और शुभ अवसरों की वृद्धि होती है।
कैलेंडर लगाने की सही दिशा
पूर्व दिशा
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं। इस दिशा में कैलेंडर लगाने से जीवन में उन्नति और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। उगते सूर्य या भगवान के चित्र वाला लाल या गुलाबी रंग का कैलेंडर शुभ माना जाता है।
उत्तर दिशा
उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। इस दिशा में हरियाली, नदी, फव्वारा, समुद्र या विवाह संबंधी चित्रों वाला कैलेंडर सुख-समृद्धि बढ़ाता है। हरे और सफेद रंग का प्रयोग श्रेष्ठ होता है।
पश्चिम दिशा
पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाने से रुके हुए कार्यों में गति आती है और कार्यक्षमता बढ़ती है। उत्तर-पश्चिम कोने की ओर कैलेंडर लगाना अधिक लाभकारी माना गया है।
इन स्थानों पर कैलेंडर न लगाएं
दक्षिण दिशा में कैलेंडर नहीं लगाना चाहिए। यह तरक्की में बाधा डालता है और घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मुख्य दरवाजे के सामने कैलेंडर लगाना भी अशुभ माना गया है, इससे घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा प्रभावित होती है।
विशेष सूचना
यदि कैलेंडर में संतों, महापुरुषों अथवा भगवान के चित्र हों, तो वह अधिक पुण्यदायी और आनंददायक माना जाता है।
























