नगरडीह गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

रामगंज (अमेठी),संवाददाता : क्षेत्र के नगरडीह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित अखिलेश तिवारी जी महाराज ने राजा परीक्षित जन्म और शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा के दौरान व्यास जी ने बताया कि देवर्षि नारद के कहने पर माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके गले में धारण की गई मुंडमाला के विषय में प्रश्न किया। इस पर भोलेनाथ ने बताया कि वे मुंड किसी और के नहीं बल्कि पार्वती जी के ही हैं, जो विभिन्न रूपों में जन्म लेकर देह त्याग करती रही हैं। हर बार उनके मुंड को शिव अपने गले में धारण कर लेते हैं।

पार्वती जी ने मुस्कराते हुए कहा कि यदि हर जन्म में वे ही देह त्याग करती रही हैं तो भगवान शिव क्यों नहीं। तब भगवान शिव ने कहा कि उन्होंने अमर कथा सुन रखी है। इस पर पार्वती जी ने भी अमर कथा सुनने की इच्छा प्रकट की। कथा वाचन के दौरान शिव-पार्वती के समीप एक तोते का अंडा था, जो कथा के प्रभाव से फूट गया और उसमें से श्री शुकदेव जी प्रकट हुए। पार्वती जी कथा सुनते-सुनते निद्रा में चली गईं, लेकिन शुकदेव जी ने पूरी अमर कथा सुन ली और अमर हो गए। जब भगवान शिव को इसका ज्ञान हुआ तो वे शुकदेव जी को दंड देने के लिए उनके पीछे दौड़े। भागते-भागते शुकदेव जी महर्षि व्यास के आश्रम पहुंचे और उनकी पत्नी के मुख के माध्यम से गर्भ में प्रवेश कर गए। बारह वर्ष तक गर्भ में रहने के पश्चात वे बाहर आए। इस प्रकार शुकदेव जी का अवतरण हुआ।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान की कथा मनुष्य को विचार, वैराग्य और ज्ञान का मार्ग दिखाती है तथा प्रभु से मिलने का पथ प्रशस्त करती है। राजा परीक्षित के कारण ही पृथ्वी को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने भगवान के 24 अवतार, व्यास-नारद संवाद, राजा परीक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन सहित अनेक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान स्मृति शेष सावित्री देवी एवं कृष्ण मुरारी दुबे सहित दीप नारायण दुबे, अरुण कुमार, कृपा शंकर, रमाशंकर, संतोष तथा एडवोकेट विवेक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का रसपान किया।

























