अहिमामऊ चौराहे पर वीआईपी मूवमेंट के चलते थमा हाईवे
प्रिंस तिवारी, संवाददाता : अहिमामऊ चौराहे पर सोमवार को उस समय हाईवे पूरी तरह थम गया, जब वीआईपी मूवमेंट के चलते ट्रैफिक रोक दिया गया। गाड़ियों की लंबी कतारें, सायरन की तेज आवाज और धूप में खड़े लोग—यह दृश्य आम जनजीवन के ठहर जाने की कहानी बयां कर रहा था।
उसी जाम में एक स्कूटी पर बैठी छोटी-सी स्कूली बच्ची नजर आई। पीठ पर भारी स्कूल बैग, चेहरे पर थकान और आँखों में घर पहुँचने की बेचैनी। वह अपनी माँ के पीछे चुपचाप बैठी थी, मानो समझ रही हो कि यह रुकावट उसके बस में नहीं है। कारण था—वीआईपी मूवमेंट। कभी कहा गया था कि वीआईपी कल्चर समाप्त हो चुका है। लाल बत्तियाँ हटाई गईं, दिखावे पर रोक लगी। लेकिन जब किसी “विशेष” के गुजरने के लिए पूरे हाईवे का ट्रैफिक रोक दिया जाता है, तो सवाल फिर खड़ा हो जाता है—क्या सच में वीआईपी कल्चर खत्म हुआ है? उस जाम में सिर्फ वह बच्ची ही नहीं थी।संभव है कोई एम्बुलेंस भी फँसी हो। बुजुर्ग लोग धूप में खड़े इंतजार कर रहे हों। नौकरीपेशा लोग अपनी समयसीमा को लेकर चिंतित हों।
लोकतंत्र में जनता को सर्वोपरि माना जाता है, फिर क्यों हर बार जनता को ही रास्ता छोड़कर खड़ा होना पड़ता है? सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन क्या ऐसी व्यवस्था संभव नहीं कि आम नागरिकों का जीवन पूरी तरह न थमे? अहिमामऊ चौराहे का यह दृश्य केवल एक दिन की बात नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की कहानी बनता जा रहा है। जब तक एक स्कूली बच्ची अपने घर लौटने के लिए यूँ बेबस होकर ट्रैफिक खुलने का इंतजार करती रहेगी, तब तक वीआईपी कल्चर के खत्म होने का दावा अधूरा ही लगेगा।























