डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में आई थी कुल 5 प्रतिशत की गिरावट
नई दिल्ली: भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया। इस गिरावट से कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा महंगी होने की संभावना है। वहीं, निर्यातकों को कुछ राहत मिलने का अनुमान है इस महीने रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 202 पैसे या 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में विदेशी कोषों की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में कुल 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
कमजोर रुपये का असर
आयात:
भारतीय आयात में कच्चा तेल, कोयला, प्लास्टिक सामग्री, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, वनस्पति तेल, उर्वरक, मशीनरी, सोना और कीमती पत्थर शामिल हैं। रुपये की गिरावट के कारण इन वस्तुओं का आयात महंगा हो जाएगा।
विदेशी शिक्षा:
विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को हर डॉलर के लिए अधिक रुपये चुकाने होंगे।
विदेशी यात्रा:
कमजोर मुद्रा के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी होगी।
धन प्रेषण:
एनआरआई द्वारा घर भेजे जाने वाले पैसे का मूल्य रुपये में बढ़ जाएगा।
निर्यात:
रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को लाभ होगा क्योंकि उन्हें एक डॉलर के बदले अधिक रुपये मिलेंगे। हालांकि, आयात पर निर्भर निर्यातक इससे लाभ नहीं उठा पाएंगे। कम आयात निर्भर क्षेत्रों जैसे कपड़ा उद्योग को सबसे अधिक लाभ और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च आयात वाले क्षेत्रों को सबसे कम लाभ होने की संभावना है।
























