शहर में एमएसएमई सेक्टर का लगभग 30% कारोबार सीधे प्रभावित हुआ है
कानपुर,संवाददाता : वैश्विक बाजार में टैरिफ की बढ़ती चिंता ने अब छोटी औद्योगिक यूनिट्स को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ये वे यूनिट्स हैं जो निर्यात कारोबार से जुड़ी बड़ी इकाइयों के उत्पाद बनाने में सहयोग करती हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि निर्यात कारोबार में गिरावट के कारण इन छोटे सहयोगी यूनिट्स में प्रोडक्शन घटने का खतरा मंडराने लगा है। शहर में एमएसएमई सेक्टर का लगभग 30% कारोबार सीधे प्रभावित हुआ है।
विदेशी खरीदार सतर्क
अमेरिका की ओर से पहले 50% टैरिफ और फिर इससे भी अधिक टैरिफ लगाए जाने की आशंका के चलते विदेशी खरीदार ऑर्डर होल्ड कर रहे हैं। उनका कहना है कि टैरिफ पर स्पष्टता आने के बाद ही ऑर्डर सुचारू रूप से चलेंगे। इस वैश्विक हलचल का असर बड़ी निर्यात इकाइयों के बाद अब छोटी सहयोगी यूनिट्स पर भी पड़ने लगा है।
सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर
सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं पैकेजिंग और प्रिंटिंग सेक्टर की इकाइयां। छोटी यूनिट्स में प्रोडक्शन कम होने से यहां कर्मचारियों की नौकरियों पर भी खतरा मंडराने लगा है। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने कहा कि जब तक इन छोटी यूनिट्स को बड़ी इकाइयों से ऑर्डर नहीं मिलेंगे, प्रोडक्शन कम ही रहेगा। ऐसी स्थिति में ये यूनिट्स अब डोमेस्टिक मार्केट से ऑर्डर पाने की योजना पर काम कर रही हैं।
नए बाजार पर जोर
शहर की 40% छोटी औद्योगिक इकाइयां बड़ी निर्यात इकाइयों पर निर्भर हैं। अमेरिका की ओर से संभावित टैरिफ के बाद इनके ऑर्डर प्रभावित हुए थे। बावजूद इसके, छोटी इकाइयां प्रोडक्शन बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं। सना इंटरनेशनल एक्जिम के निदेशक डॉ. जफर नफीस ने बताया कि अमेरिका द्वारा विश्व के कई देशों पर टैरिफ बढ़ाने की बातें सामने आने के कारण निर्यातक जिनके कई देशों से ऑर्डर आते हैं, वहां भी काम धीमा हो गया है। इसका अधिक असर छोटी निर्यात सहयोगी इकाइयों पर पड़ा है।






















