मुद्रास्फीति में नरमी से विकास को मिलेगा मजबूत आधार
दावोस। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि मुद्रास्फीति में नरमी और मजबूत आर्थिक बुनियाद के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था अगले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से 6–8 प्रतिशत और मौजूदा कीमतों पर 10–13 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी। वे यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के इतर आयोजित ‘बेट ऑन इंडिया – बैंक ऑन द फ्यूचर’ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
वैष्णव ने अनुमति प्रक्रियाओं के सरलीकरण को निवेश और विकास की गति बढ़ाने का अहम कारक बताते हुए कहा कि दूरसंचार टावर स्थापित करने में लगने वाला औसत समय 270 दिनों से घटकर सिर्फ सात दिन रह गया है। उन्होंने बताया कि 89 प्रतिशत अनुमतियां अब तत्काल दी जा रही हैं, जो नीतिगत सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण है। मंत्री ने नीति निर्माण और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व का दायित्व है कि नौकरशाही राजनीतिक निर्णयों के अनुरूप काम करे। उन्होंने उद्योग जगत के साथ चुनौतियों के प्रभावी संवाद की आवश्यकता भी रेखांकित की और अमेरिका व यूरोप में डेटा स्थानीयकरण मानकों के मानकीकरण का उदाहरण दिया।
इस अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष और ईवाई अफ्रीका–भारत क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंध साझेदार राजीव मेमानी ने कहा कि भारत अभी प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से निचली श्रेणी में है, जिससे स्पष्ट है कि 2047 तक इसे कम-से-कम पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने पश्चिम एशिया, एशिया-प्रशांत और ब्रिटेन जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों के बढ़ते महत्व, जीएसटी दरों में कटौती और नए श्रम कानूनों जैसे प्रमुख सुधारों का भी उल्लेख किया।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तेज तकनीकी बदलावों से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत बड़े पैमाने, स्थिरता और दीर्घकालिक अवसरों वाला बाजार बनकर उभरा है। गोलमेज बैठक में वैश्विक वित्त व बैंकिंग, बीमा व पुनर्बीमा, प्रौद्योगिकी व डिजिटल प्लेटफॉर्म, औद्योगिक स्वचालन, परिवहन, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, खाद्य एवं पेय, रसायन, उपभोक्ता वस्तुएं, स्वच्छ ऊर्जा समाधान और सीमा-पार भुगतान जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
























