कोर्ट ने कहा— मान्यता न होना मदरसा बंद करने का आधार नहीं, अधिकारियों को नहीं है अधिकार
लखनऊ,संवाददाता : बगैर मान्यता वाले मदरसों को अवैध घोषित कर बंद किए जाने के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। श्रावस्ती स्थित मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को बिना मान्यता के आधार पर मदरसों को बंद करने का अधिकार देता हो। मामले में श्रावस्ती के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मदरसे को केवल मान्यता न होने के आधार पर बंद करा दिया गया था। इसके खिलाफ मदरसा प्रबंधन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि बिना मान्यता वाला मदरसा राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की सहायता या अनुदान का हकदार नहीं होता, लेकिन उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमन, 2016 के तहत केवल मान्यता न होने के आधार पर मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि रेगुलेशन में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है, जो अधिकारियों को यह अधिकार देता हो कि वे केवल मान्यता के अभाव में मदरसे के संचालन को रोक सकें।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक मदरसे को मान्यता प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक वह किसी भी सरकारी ग्रांट का दावा नहीं कर सकेगा। साथ ही, मदरसा शिक्षा बोर्ड याचिकाकर्ता मदरसे के छात्रों को बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बैठने की अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं होगा। हाईकोर्ट ने बंद किए गए मदरसे को तत्काल खोलने के निर्देश जारी किए हैं।
























