18 जनवरी को शुभ मुहूर्त में होगा स्नान-दान, हर्षण, सर्वार्थ सिद्धि और अर्धोदय योग से बढ़ेगा आध्यात्मिक प्रभाव
लखनऊ,संवाददाता : माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 12:03 बजे से 18 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। इसी कारण स्नान-दान का विशेष महत्व 18 जनवरी की सुबह माना गया है। ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार, इस वर्ष मौनी अमावस्या पर हर्षण योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही अर्धोदय योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसे स्कंद पुराण में अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।
इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। चंद्रमा धनु राशि में स्थित होंगे, जबकि सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल चारों ग्रह मकर राशि में एक साथ संयोग बनाएंगे। यह ग्रह स्थिति इस दिन को आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष फलदायी बनाती है। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किए गए स्नान, दान और पूजा से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन की गई पूजा-अर्चना से राहु, केतु और शनि से संबंधित दोषों की शांति होती है। ज्योतिष शास्त्र में इसे ग्रह दोष निवारण के लिए विशेष रूप से शुभ दिन माना गया है।
इस अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पूरे दिन मौन व्रत रखते हैं। मौनी अमावस्या पर भगवान विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मौन धारण करने और कटु वचनों से बचने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या पर तिल, तिल का तेल, आंवला, कंबल और वस्त्र का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसे दान से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का संचार होता है।






















