मदिरा एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन से बचने की परंपरागत सलाह दी जाती है
शनिदेव को कर्म, श्रम और न्याय का देवता माना गया है। ऐसा विश्वास है कि उनकी कृपा से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और उन्नति प्राप्त होती है। विशेष रूप से शनि की अंतर्दशा, साढ़ेसाती या ढैय्या के समय निम्न बातों का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है:
1. श्रमिकों और गरीबों के प्रति न्याय
- किसी भी मजदूर से कार्य कराने के बाद उसकी पूरी मजदूरी अवश्य दें।
- मान्यता है कि गरीब, असहाय और श्रमिक शनि के प्रतिनिधि माने जाते हैं।
2. परिश्रम और पुरुषार्थ
- शनि को श्रम का देवता माना गया है।
- मेहनती, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति ही शनि की कृपा के पात्र माने जाते हैं।
- हस्तरेखा शास्त्र में भाग्य रेखा का शनि पर्वत से संबंध होना इसी का प्रतीक माना जाता है।
3. नशे से परहेज
- साढ़ेसाती या शनि की प्रतिकूल दशा में
मदिरा एवं अन्य मादक पदार्थों के सेवन से बचने की परंपरागत सलाह दी जाती है।
4. काली वस्तुओं से संबंधित मान्यताएँ
- शनिवार के दिन लोहे, कोयले, चमड़े या काली वस्तुओं की खरीद-फरोख्त अथवा उपहार से बचने की मान्यता है।
5. विशेष पारंपरिक प्रयोग
- काले रंग की लकड़ी की बांसुरी में चीनी भरकर, किसी निर्जन स्थान पर मिट्टी में दबाने का प्रयोग कुछ परंपराओं में बताया गया है (इसे केवल एक बार करने की बात कही जाती है)।
6. सरसों और काले तिल का प्रयोग
- शनिवार को 50-50 ग्राम सरसों और काले तिल मिलाकर
सरसों के तेल का छींटा दें। - सात बार अपने ऊपर से उतारकर नदी, तालाब या जलाशय में प्रवाहित करें।
- यह प्रयोग माह में एक बार करने की परंपरा बताई जाती है।
7. शिव उपासना
- शनिवार को शिव मंदिर में स्वयं साफ-सफाई करना।
- शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित कर
“ॐ नमः शिवाय” का एक माला जाप करना।






















