सीएम योगी के नेतृत्व में ‘बॉटलनेक’ से ‘ब्रेकथ्रू’ तक का सफर
लखनऊ,संवाददाता : कभी जटिल नियमों, प्रशासनिक देरी और निवेश संबंधी अनिश्चितताओं के लिए पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी निवेश और औद्योगिक राज्यों में शुमार हो चुका है। बीते साढ़े आठ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने शासन और विकास का ऐसा मॉडल अपनाया, जिसमें “बॉटलनेक” को समाप्त कर “ब्रेकथ्रू” को नीति का आधार बनाया गया। इस परिवर्तन की धुरी रही मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस की अवधारणा। सरकार ने नियमों और प्रक्रियाओं की भीड़ को कम करते हुए निर्णय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया। विभागीय चक्करों की संस्कृति को खत्म कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उद्योग जगत के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सीधा लाभ मिला।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तर प्रदेश की छलांग केवल रैंकिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह निवेशकों के भरोसे की वापसी का प्रतीक बनी। वर्ष 2017-18 में 12वें स्थान पर रहने वाला प्रदेश 2019 में दूसरे स्थान तक पहुंचा और बाद के वर्षों में ‘टॉप अचीवर’ श्रेणी में अपनी जगह बनाए रखी। लॉजिस्टिक्स, भूमि प्रशासन और वाणिज्यिक सुशासन में बेहतर प्रदर्शन से निवेश से जुड़ी पारंपरिक आशंकाएं काफी हद तक दूर हुईं।
डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम ‘निवेश मित्र’ ने औद्योगिक मंजूरियों की तस्वीर ही बदल दी। 45 विभागों की सैकड़ों सेवाओं को एक ही मंच पर लाकर यह सुनिश्चित किया गया कि सभी अनुमतियां तय समय सीमा में, पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। प्रदेश सरकार के इन सुधारात्मक कदमों ने उत्तर प्रदेश को निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
























