नारद, पद्म, गरुड़, विष्णु व धर्मसिन्धु पुराणों में वर्णित है महापुण्यकाल
मकर संक्रांति को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी पर्व माना गया है। इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे उत्तरायण का शुभारंभ होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया स्नान, दान, तर्पण एवं देवपूजन अक्षय फल प्रदान करता है।
नारद पुराण का उल्लेख
“मकरस्थे रवौ गङ्गा यत्र कुत्रावगाहिता…”
नारद पुराण के अनुसार सूर्य के मकर राशि में स्थित रहने पर जहाँ कहीं भी गंगा स्नान किया जाता है, वह सम्पूर्ण जगत को पवित्र करता है और अंततः इन्द्रलोक की प्राप्ति कराता है।
पद्म पुराण का विधान
पद्म पुराण (सृष्टि खंड) के अनुसार जो व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान नहीं करता, उसके पीछे सात जन्मों तक दरिद्रता लगी रहती है। इस दिन स्नान करने से दस हजार गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है। उस समय किया गया दान, तर्पण एवं देवपूजन अक्षय होता है।
गरुड़ पुराण का विशेष कथन
गरुड़ पुराण के अनुसार मकर संक्रांति, सूर्यग्रहण एवं चंद्रग्रहण के अवसर पर गया तीर्थ में पिंडदान करना तीनों लोकों में दुर्लभ फल प्रदान करता है।
मकर संक्रांति पर विशेष पूजन विधान
- लक्ष्मी प्राप्ति एवं रोग नाश हेतु:
गोरस (दूध, दही, घी) से भगवान सूर्य की पूजा - विपत्ति व शत्रु नाश हेतु:
तिल–गुड़ से भगवान शिव की पूजा - यश, विद्या एवं ज्ञान हेतु:
वस्त्र से देवगुरु बृहस्पति की पूजा
तिल का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन सफेद व काले तिल का प्रयोग एवं दान विशेष फलदायी माना गया है।
तिल–गुड़ से बनी मिठाइयाँ जैसे रेवड़ी, गजक का सेवन एवं स्नान जल में तिल मिलाना शुभ होता है।
विष्णु पुराण का सिद्धांत
विष्णु पुराण के अनुसार सूर्य के कर्क राशि में रहने पर दक्षिणायन और मकर राशि में प्रवेश करने पर उत्तरायण कहलाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है।
धर्मसिन्धु का निर्देश
- उत्तरायण में तिल के तेल के दीपक शिव मंदिर में जलाने चाहिए
- तिल मिश्रित चावल से शिव पूजन
- काले तिल से स्नान, उबटन, दान, होम व भक्षण करना श्रेष्ठ फल देता है
महादेव व सूर्य आराधना का महाफल
- मकर संक्रांति पर महादेव का घृत से अभिषेक महाफलदायी
- वस्त्रदान करने से विशेष पुण्य
- दूध से सूर्य को स्नान कराने से सूर्यलोक की प्राप्ति
नारद पुराण का अंतिम फलादेश
जो व्यक्ति सूर्य संक्रांति के दिन दूध आदि से श्रीहरि का अभिषेक करता है, वह इक्कीस पीढ़ियों सहित विष्णुलोक में वास करता है।























