अमेठी जिले के हजारों श्रद्धालु प्रयागराज में कर रहे एक माह का कल्पवास
अमेठी,संवाददाता : जिले के हजारों श्रद्धालु माघ मेले के अवसर पर प्रयागराज में संगम की पावन रेती पर एक माह तक कल्पवास कर रहे हैं। मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा (तीन जनवरी) से मेले का शुभारंभ हो चुका है। प्रयागराज–अयोध्या हाईवे, लखनऊ–प्रयागराज हाईवे एवं रायबरेली–जौनपुर मार्ग से श्रद्धालुओं के वाहन लगातार मेला क्षेत्र की ओर पहुंच रहे हैं।

गंगा स्नान के लिए अभी भी श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा अतिक्रमण हटाया जा रहा है। श्रद्धालु अपने वाहनों पर गठरी, पुआल और आवश्यक सामग्री लादकर मेला स्थल पहुंच रहे हैं, जहां टेंट लगाकर निवास कर रहे हैं और धूनी रमाकर साधना में लीन हैं। कल्पवासियों की सेवा के लिए परिवार का कोई न कोई सदस्य भी उनके साथ मौजूद है।

घर-परिवार से दूर रहकर श्रद्धालु एक माह तक गंगा स्नान, पूजन, दान-पुण्य और प्रवचनों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। जिले की सभी तहसीलों से लोग कल्पवास के लिए प्रयागराज पहुंचे हैं। क्षेत्र के खानापुर गांव निवासी श्रीकांत मिश्रा ने बताया कि धर्म नगरी में बिताया गया यह एक माह जीवन को सार्थक करने वाला है। मां गंगा के तट पर रहकर श्रद्धालु स्नान-पूजन और दान कर रहे हैं।

भव बंधनों से मुक्ति की कामना
कल्पवास पौष माह के 11वें दिन से प्रारंभ होकर माघ माह के 12वें दिन तक किया जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू होने वाले इस एक माह के कल्पवास से एक कल्प के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पं. जय गोविंद तिवारी के अनुसार जहां-जहां कुंभ का आयोजन होता है, वहां कल्पवास का विशेष महत्व है। प्रयागराज में संगम तट पर माघ मास में कल्पवास का विधान है। कुछ श्रद्धालु मकर संक्रांति से भी कल्पवास आरंभ करते हैं। यह साधना आध्यात्मिक शुद्धि, पुण्य लाभ और जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्ति का माध्यम मानी जाती है।
























